Monday, June 22, 2009

Fathers' Day

चहरे पे मुस्कान समेटे ,
गम चुरा लेते हो - मेरे जीवन के हर पल से
काँटों के मानिंद, गुलाब से
चुन लेते हो आंसू , मेरे आंखों के हर ख़्वाब से

कर दिए हैं मेरे नाम ,
अपने सपने, अपने अरमां
अपने जीवन का हर एक पल,
हर एक मुस्कान

वो माथे से ढलती -
पसीने की बूँद,
यूँ ही उठी है जो चमक,
चुनते वक्त मेरे लिए,
खुशियों के फूल

बदल गया है बहुत कुछ ,
एक अरसे के बाद
गूम हो गए हैं कहीं क्या ?
जो कल तक थे तुम्हारे साथ

भीड़ में इस दुनिया की,
क्या हो गए तुम एकाकी?
कहाँ जा रहे हो अब,
अतीत की यादों में गूम ?

चली आ रही हूँ,
पीछे तुम्हारे,
संग अपने लिए-
उन्ही खुशियों की रुनझुन

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