Monday, June 8, 2009

तट पर देखा ....

तट पर देखा ,
बनाए थे किसी ने अपने सपनों के घर
न जाने उन्हें छोड़,
वो हाथ गए किधर
रेत पर समय की कुरीदी गयी रेखा

बड़ी शिद्दत से सँवारे हैं ,
लोगों ने अपने सपने
मैं भी ....
दुनिया की भीड़ में संजोये
कुछ ख़्वाब अपने,
चली जा रही हूँ सागर के किनारे ,
छूट रहे हैं कुछ निशाँ,
मेरे कदमों के सहारे

बनते हैं लोग कल्पना के घरोंदे ,
सजाते हैं प्यार भरे कोमल सपने
खुशियों को उतारने की लालसा ले,
जमीन पर
करता है कितनी कोशिशें, ये इंसान
मगर .....

विचारों की ये लदी बिखर सी गयी ,
चिर-शांत समंदर में हलचल सी हुई
पलकें जो झपकीं , मैंने देखा....
एक लहर सी दौड़ गयी रेत के तट पर

ले गयी संग अपने , सपनों के घरोंदे ,
वो खुशियों की दुनिया,
कल्पना का संसार
और छोड़ गयी जीने के लिए एक सत्य साकार
बसे थे जिसमें , कुछ सीप , कुछ मोत्ती ,
और कुछ अलग ही औजार

मैंने जाना ...
सपने होते हैं टूट जाने को ,
जैसे की हर साथ है सफर में,
छूट जाने को

थम गए मेरे हाथ अनायास ही ,
उठे थे जो रेत पर कुरेदने को कुछ लकीरें
लहर के साथ बह गए मेरे कदमों के निशा भी
पर छोड़ गयी एक संदेश, वो लहर गयी जहाँ भी

मैंने सोचा ...
अस्तित्व न रहेगा एक दिन इस जहाँ में
मेरे बाद ...
कोई न रहेगा ये कच्चे घरोंदे बचाने
वक्त के थपेड़ों - बीच इन्हें सजाने

फ़िर क्यों करून सपनों को रेत पर साकार ?
जब जानती हूँ मैं,
सपनों का ये महल , टूट जाएगा एक दिन,
और संग अपने , दुखी कर जाएगा मेरा मन

ख्यालों में खोयी मैं,
कुछ जाग सी गयी
जसे दिल में मेरे दस्तक कुछ यूँ हुई ...
" संजों के रखना , अपने सपनों का संसार,
मजबूत दीवारों से करना उन्हें साकार
सही वक्त तक अरमां दबाये रखना,
अनमोल सपनों को मिटने से बचाए रखना "

समंदर में फ़िर, हलचल सी सुनायी दी
जैसे किसी लहर ने ही , ये कह के विदाई दी



5 comments:

Nidhi Goyal said...

bahut pyara likha hai .....bas itna hi kehna hai

dipu said...

bahut acha lkha hai aapne....

dipu said...

its really true...
as for me too

Asmi said...

thanks frns

Gags said...

amazing.. :)